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मशहूर फिल्म अभिनेता रज़ा मुराद ने टेन न्यूज़ ‘योजना कैंडिड टॉक’ में सुनाए सुहाने किस्से

Ten News Network

नई दिल्ली :— कोरोना महामारी में टेन न्यूज़ नेटवर्क दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन करता रहा है , घर बैठे मशहूर अभिनेता , अभिनेत्री , नेता और समाज में काम करने लोगों को दर्शकों से रूबरू करवाता रहा है | इस कड़ी में टेन न्यूज़ नेटवर्क ने ‘योजना कैंडिड टॉक’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमे मशहूर अभिनेता रजा मुराद शामिल हुए। वही इस कार्यक्रम का संचालन मशहूर कवियत्री, गायिका, वैज्ञानिक, उद्यमी डॉ योजना सह जैन ने किया । आपको बता दें कि डॉ योजना सह जैन एक तेजतर्रार एंकर भी है , जिन्होंने टेन न्यूज़ नेटवर्क के कार्यक्रम में शामिल रहे मशहूर अभिनेता रजा मुराद से महत्वपूर्ण प्रश्न किए, जिसका जवाब भी दिया गया । खासबात यह है कि योजना सह जैन जर्मनी की निवासी है। डॉ योजना ने रमजान की बधाई के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की।

 

मशहूर अभिनेता रजा मुराद ने शायरी के साथ शुरुआत करके अपनी बात रखी और कहा “”अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी ,ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है” | उन्होंने कहा कि जिंदगी में कुछ तकलीफ आस-पास से आती है, कुछ ऊपर से आती है और कुछ अपनी बनाई हुई होती हैं। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपनी जिंदगी कैसे जीते हैं। उन्होंने कहा मैंने अपनी जिंदगी में हमेशा यह कोशिश की है, कि मेरे जीवन मैं जितने कम कंपलिकेशन हो, उतना सही है।

आगे उन्होंने कहा की सबसे पहले तो मेरे अंदर एक आदत है किसी का 1 रुपया मुझे अगर देना हो , तो मुझे रात में नींद नहीं आती। मुझे उधार लेना , बहुत बुरा लगता है और यही एक वजह है कि मेरे पास कोई मांगने वाला नहीं आता। मांगने से पहले ही उसको मैं दे देता हूं , जिसका जो भी होता है। उन्होंने कहा जो मैं हूं , मैं वही हूं , मैं एक सादगी पसंद आदमी हूं और मुझे सादे लोग ही अच्छे लगते हैं।

उन्होंने कहा अगर आप किसी को कुछ नहीं दे सकते , तो इज्जत दे दीजिए , उससे आप भी खुश रहेंगे और ऊपर वाला भी खुश रहेगा। जो हम व्रत रखते हैं , रोजे रखते हैं , वह सब हम अपने लिए रखते हैं। अपने भगवान को खुश करने के लिए रखते हैं , लेकिन हम यह नहीं सोचते कि जो अल्लाह की भगवान की बनाई हुई मखलूक है , जो इंसान है , जो गरीब हैं , उनके बारे में हम लोग नहीं सोचते , अगर आप उनको खुश कर सकते हैं , अपने किसी भी तरीके से , तो ऊपर वाला आपको हमेशा खुश रखेगा। उन्होंने कहा “नशा पिला के गिराना तो सबको आता है, मजा तो तब है की गिरतों को थामने से आपको मिले’ किसी को खुश करके , किसी की मदद करके , जो आपको खुशी मिलती है , वह किसी और चीज में नहीं आती है , इंसान को।

अभिनेता रजा मुराद ने अपनी मां के बारे में कहा कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते ,इसलिए उन्होंने मां को बनाया है। मां का जो दर्जा होता है वह बुलंद दर्जा किसी का नहीं होता। उन्होंने शेर कहते हुए कहा की “सख्त राहों में भी आसान सफर लगता है, यह मेरी मां की दुआओं का असर लगता है।” उन्होंने कहा ये मेरी माँ की दुआएं हैं उन्हीं की नसीहत है , अगर मेरी वालिदा नहीं होती , तो मैं जिंदगी की राहों में भटक गया होता।

कई बार जिंदगी में ऐसे मौके आए भटकने के , लेकिन हमेशा मुझे यही ख्याल आता था , अगर मैंने कोई गलत काम किया , अगर मैं भटक गया तो मेरी मां को कितना सदमा लगेगा। मैं इस बात का हमेशा ध्यान रखता था। मेरी मां के प्यार ने मुझे कभी इधर उधर होने नहीं दिया, हालांकि जिंदगी में कई सारी सिचुएशन मेरे साथ आई कि जिंदगी में काफी बार भटक सकता था , लेकिन मैं नहीं भटका।

उन्होंने कहा हम चार बहन भाई थे , बड़ी बहन का इंतकाल हो गया था। अब हम तीन हैं। 4 बच्चों की मेरी माँ ने इतनी मुश्किलों से परवरिश की, उन्हें शिक्षा दिलाई, उनके अंदर बहुत ज्यादा हिम्मत थी और वह बहुत ही प्रोटेक्टिव थी। उनके अंदर बहुत हिम्मत थी तूफानों से सामना करने की और हमारी जिंदगी में बड़े उतार-चढ़ाव आए काफी मुश्किलें आई , लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी और वह जिंदगी में अपने बच्चों को हमेशा प्रोटेक्ट करके चलती रही।

उन्होंने बताया एक बार की बात है यह किस्सा 1968 का है , जब में मैट्रिक का एग्जाम दे रहा था और जिस घर में हम रहते थे वहां बिजली की बहुत समस्या थी। तो मैं भोपाल में था और भोपाल में एक जगह है जिसे ईगा हिल कहते हैं वहां एक लैंपोस्ट है। जिसके नीचे में पढ़ने जाता था , क्योंकि वहां बिजली 10 बजे बंद हो जाती थी और मैं रात के 12 बजे से उस लैंपोस्ट के नीचे सुबह 5 बजे तक पड़ता था। फिर घर जाता था, नहाता धोता था और नाश्ता करके फिर मैं इम्तिहान के लिए निकल जाता था और पेपर को जो वक्त होता था। वह होता था सुबह 7:00 से 10:00 बजे तक का।

उन्होंने बताया चार-पांच दिन हो गए , मुझे इस तरीके से जागते हुए और एक बार जब मैं घर आया और मैंने नहाया धोया और मैंने सोचा कि थोड़ा आराम कर लेता हूं और मेरी आंख लग गई क्योंकि मैं चार-पांच रात का जागा हुआ था और मुझे इतनी भयंकर नींद आ रही थी। उस दिन मैं सो गया और मेरी नींद इतनी गहरी थी कि मानो मैं बेहोश हो गया हूं। अब मेरी मां ने महसूस किया कि इसे तो स्कूल जाना है इसका तो आज एग्जाम है उन्होंने मुझे उठाने का प्रयास किया लेकिन मैं बिल्कुल ही बेहोश था। काफी प्रयास करने के बाद भी मैं नहीं उठा। जिसके बाद उन्होंने मेरे ऊपर पानी फेंका, जिसके बाद में एकदम से उठ गया और जैसे ही मैं उठा उस समय मैंने घड़ी देखी तो 6:30 बज रहे थे और एग्जाम जो था उसने मात्र आधा घंटा रह गया था। मैंने जब अपनी मां की आंखें देखी तो उनकी आंखें डबडबाई हुई थी , उन्होंने मुझसे कहा मैं तुझे उठा उठा कर थक गई , लेकिन तू उठ नहीं रहा था और मुझे बहुत ज्यादा अफसोस हो रहा था ,अगर तू आज का एग्जाम नहीं देता तो तेरा पूरा साल बर्बाद हो जाता , उनकी आंखें मुझे आज भी याद है।

आगे उन्होंने बताया भोपाल से हमारी कई सारी पुरानी यादें हैं , उन्होंने कहा मैंने अपने जीवन में कई सारे दिन देखे हैं | मैंने ऐसे दिन भी देखे हैं जब अनाज न होने की वजह से हमें भूखा रहना पड़ा हो। उन्होंने कहा एक बार की बात है जब हम भोपाल से मुंबई आ रहे थे तो हमारे पास न प्लेन में बैठने के पैसे थे ना हम फर्स्ट क्लास प्लेन का टिकट एफोर्ड कर सकते थे। तो जब मुंबई वाली ट्रेन आयी प्लेटफार्म पर , वह खचाखच भरी हुई थी। उंसमे जगह नहीं थी बिल्कुल भी और हमारे पास जो टिकट थी , वह बिना रिजर्वेशन की थी। तो उस समय मुझे समझ में नहीं आया कि, हमें क्या करना चाहिए, क्योंकि ट्रेन भी 5 मिनट में रवाना होने वाली थी। तो मैंने क्या किया मैंने देखा कि ट्रेन की खिड़की के पास एक जगह ग्रिल नहीं लगी हुई थी। तो मैंने अपनी मां को गोद में उठाकर उस खिड़की के जरिए ट्रेन के अंदर किया और मैं रात भर खड़ा रहा तो आप सोच सकते हैं कि हम उन हालातों से भी गुजरे हैं। जब हम ट्रेन से भी सफर करने में वह सारी सुविधाएं हम नहीं ले सकते थे।

 

रज़ा मुराद ने बताया कि मेरी जिंदगी का अरमान था कि मेरी मां ने अपनी जिंदगी में बहुत तकलीफ उठाई हैं। मैं उनको आराम पहुंचाना चाहता था। तो आहिस्ता आहिस्ता जब मेरे पास काम आना शुरू हुआ, कुछ पैसे मेरे पास आने लगे और फिर जब ‘राम तेरी गंगा’ फ़िल्म रिलीज हुई उसके बाद मेरे पास मानो काम की बाढ़ आ गई थी। 14 साल मुझे इंतजार करना पड़ा , लेकिन उस फिल्म के बाद से मेरी जिंदगी की काया पलट गई। तो फिर भी मैं सोचता था कि मुझे मेरी मां को खुश करना है तो मैं क्या करता था कि मैं सुबह 7:00 बजे निकलता था और एक दिन तीन से चार सूट करता था और रात के 1 – 2 बजे घर आता था।

तो उस दौरान भी मेरी मां मेरा इंतजार कर रही होती थी मेरे घर का नाम मुन्ने हैं तो घर पर मुझे सब मुन्ने मियां कहकर पुकारते थे। फिर मैंने उनकी आंखों में आंसू देखे उन्होंने मुझसे कहा कि मुन्ने तू इतना काम क्यों कर रहा है। क्या कर रहा है तू बेटा और हम उन्हें बिया कहते थे तो मैंने उनसे कहा बिया मेरी जिंदगी की जो गाड़ी है 14 साल लेट चली है और मैं उन 14 सालों को कवर करना चाहता हूं और मैंने उनसे कहा एक बात याद रखियेगा जो काम में कर रहा हूं आज मुझे उससे ही आराम मिल रहा है। मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है और मैंने उनसे कहा कि हमने जिंदगी में साथ में बहुत सी तकलीफ उठाई है और मैं यह चाहता हूं कि अब हम आराम भी साथ करें। उन्होंने कहा मेरी वालीदा तो चली गई , लेकिन उनकी यादें अभी भी खटकती हैं और मेरे साथ है , तो उनकी दी हुई नसीहत और उनका दिया हुआ प्यार और जो मैं आज हूं वह अपनी मां की वजह से हूं।

अभिनेता रजा मुराद ने बताया कि उनकी शादी भी , उनकी मां की रजामंदी से हुई है , उन्होंने बताया कि मैं काम में लगा रहता था और मेरी मां मेरे लिए लड़कियां देखती रहती थी , कुछ लड़कियां मुझे पसंद नहीं आती थी। उन्होंने बताया एक बार की बात है मेरे वालिद साहब ने मेरे लिए एक लड़की देखी , वह लड़की रामपुर की थी , तो वालीद साहब ने कहा कि आ जाओ लड़की को देखने के लिए , तो मैं लड़की देखने चला गया। तो लड़की अच्छी थी , लेकिन हमारा कुछ मैच नहीं हो रहा था , क्योंकि हम शुरू से मुंबई में रहे हैं , हम शो बिजनेस में हैं , तो वह जो लड़की थी सबसे पहले उसकी हाइट बहुत छोटी थी।

उन्होंने कहा दुल्हन वही जो पिया के मन को भाए , लेकिन वह मेरे मन को नहीं भाई। तो मैंने अपने वालिद साहब को साफ लफ्जो में कह दिया कि लड़की मेरे मन को नहीं भाई है और वह अचंभित हो गए , तो उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा यह रामपुर है यह मुंबई नहीं है यहां पर लड़के लड़कियों को एक दूसरे को दिखाया नहीं जाता है और हमने तो तुम्हारी मीटिंग लड़की के साथ अरेंज की है। जब वह बहुत ज्यादा अपसेट हुए तो मैंने उनसे एक बात कही कि देखिए अब्बा आपको 5 मिनट खुश करने के लिए मैं अगर हां कर भी दूं तो उससे मैं सारी जिंदगी खुश नहीं रह पाऊंगा। तो वह बहुत ही अपसेट हुए इस बात को लेकर , फिर क्या था कि वह बात आई गई हो गई।

फिर मेरी मां ने मेरी होने वाली बीवी को पसंद किया। उन्होंने मुझे कहा कि एक लड़की देख ली है तो मैंने उनसे कहा कि बहुत अच्छी बात है ,अगर आपने लड़की देख ली है , फिर उन्होंने कहा कि मैं फोटो मंगवा लेती हूं , तू भी देख लियो , तो मैंने कहा कोई जरूरत नहीं है , अगर आपने देख ली है , तो आपकी पसंद पर मुझे किसी तरह का शक नहीं है। आप जितना प्यार करती हो , लड़की यकीनन बहुत अच्छी होगी। रज़ा मुराद ने बताया की हमारे यहां तरीका यह होता है कि लड़के वालों की तरफ से लड़की के घर एक पयाम जाता है , तो हमारा पयाम गया तो उन्होंने बताया कि उस समय यह बातें होती थी कि लड़का फिल्म इंडस्ट्री से बिलॉन्ग करता है , तो उसकी 10 गर्लफ्रेंड होंगी , क्या करता होगा , तो उस समय बरगलाने वाले लोग बहुत थे।

उन्होंने बताया कि मेरे होने वाले जो सास-ससुर थे , उन्होंने शादी के लिए मना कर दिया। तो मेरी मां ने कहा तेरी शादी तो इसी लड़की से होगी। उस जमाने में मेरी एक फिल्म बहुत जबरदस्त हिट हुई जिसका नाम था ‘एक दूजे के लिए’ उसमें मैंने एक शराबी का रोल किया था। तो मेरी वालीदा जब वहां पर गई और उन्होंने जब मेरा नाम लिया तो मेरी बीवी तो मुझे पहचान गई क्योंकि वह यंग थी और फिल्में देखती थी। तो मेरी मां के जाने के बाद मेरी सास ने मेरी बीवी से पूछा कि यह रजा मुराद कौन है, कौन सी फिल्में की है , दोनों ने बताया कि अभी हमने देखी थी ना एक-दो दिन पहले फिल्म एक दूजे के लिए जिसमें उन्होंने शराबी का रोल किया था।

तो मेरे सासू मां ने कहा कि मैं अपनी बेटी की जिंदगी किसी शराबी के हाथ बर्बाद नहीं करने दूंगी , तो वह शराबी वाली इमेज भी बाहर आ चुकी थी और 6 महीने लग गए उनको मनाने के लिए अब 6 महीने के बाद वह मान गए। उसके बाद जब हमारी शादी हुई और वह हमारे घर आई तो , उनके लिए यह माहौल बिल्कुल ही नया था , लेकिन मुझे एक बात समझ में आ चुकी थी कि वह मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करती थी। दोनों ने मुझसे कहा कि मियां मैं कुछ दिनों के लिए भोपाल जाना चाहती हूं , मुझे मेरे परिवार वाले बहुत याद आ रहे हैं , क्या मैं घर जाऊं , तो शाम को मैं प्लेन का टिकट घर ले आया , क्योंकि मेरा दिल भी नहीं चाहता था कि उन्हें कोई तकलीफ हो , क्योंकि शादी को अभी एक महीना हुआ था और शाम को मैं उन्हें एयरपोर्ट छोड़ने के लिए गया और एयरपोर्ट पर जो मैंने उनकी आंखें देखी भीगी हुई , तो मेरी आंखें भी भर आई। उनकी आंखें बिल्कुल डबडबा रही थी , आंसू टपक रहे थे । उन्होंने कहा मां के आंसू और बीवी के आंसू को मैं आज तक भूला नहीं हूं। आज भी जब मैं उस मंजर को याद करता हूं , तो मेरी आंखें भीग जाती है।

अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि हर शरीफ आदमी अपनी बीवी से डरता है और दुनिया में 99.9 प्रतिशत लोग अपनी बीवी से डरते हैं और पॉइंट 1% जो कहते हैं कि वह अपनी बीवी से नहीं डरते , वह झूठ बोलते हैं। वह जो डर है वो खौफ का डर नहीं है , वह प्यार का डर है। उन्होंने कहा रूठना 1 सेकंड का काम है और मनाने में महीने लग जाते है । रजा मुराद ने बताया कि जब उनकी बीवी उनसे रूठ जाती है , तो वह खामोश हो जाते हैं और कई बार उन्हें सॉरी भी बोलते हैं उसके बाद वह बिल्कुल नॉर्मल हो जाती हैं उनका थोड़ी देर का गुस्सा होता है और अगर यह गुस्सा भी उनका ना हो और यह रूठना मनाना भी ना हो तो जिंदगी बड़ी बोरिंग हो जाती है।
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उन्होंने कहा जिंदगी में थोड़ा नमक थोड़ी मिर्ची और थोड़ा मसाला होना चाहिए। अभी कोरोना का समय चल रहा है ऐसे में बावर्ची हमारे घर पर नहीं आ रहा है तो मेरी बीवी ऐसे में सुबह उठकर मुझसे पहला सवाल करती हैं कि मियां आप क्या खाएंगे, तीनों वक्त का खाना वह मेरे लिए पकाती है। नाश्ता भी देती है, लंच भी देती है और मुझसे पूछते हैं कि आप क्या खाएंगे यह क्या होता है कि यह प्यार होता है। यही खाना आपको रेस्टोरेंट में भी मिलेगा , वही मसाले होते हैं , लेकिन घर का खाना आपको क्यों पसंद होता है उस खाने के पीछे उस पकाने के पीछे जो जज्बात होते हैं , वह प्यार होता है।

अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि मुझे चाय बनाने के अलावा खाने में कुछ नहीं पकाना आता मुझे यह भी नहीं पता कि चावल कैसे पकते हैं , मैंने जिंदगी में आज तक रोटी नहीं पकाई। उन्होंने कहा मेरे वालिद साहब ने मुझे सिखाया है कि अगर आप किसी व्यक्ति को सौदा लाने के लिए भेजेंगे तो है कुछ भी उठा लाएगा अगर आप उसे एक गोष्ट लेने भेजें तो कसाई उसे कैसा भी गोष्ट देगा , वह उठा लाएगा। आप अगर जाएंगे , आपको अगर पता है कि कैसा गोष्ट लेना है। तो वह आपको पता है इसलिए मैं जो भी सब्जी या फिर खाने का सामान बाहर से लाना होता है वह मैं खुद लाता हूं और इसने मुझे किसी तरह की शर्म नहीं आती।

फिल्म नमक हराम के बारे में बताते हुए अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि इस फिल्म का एक शेर है जिस की फरमाइश आज भी मुझसे होती है वह मैं आपको सुनाता हूं ” जीने की आरजू में मरे जा रहे हैं लोग, मरने की आरजू में जीये जा रहा हूं मैं” उन्होंने कहा कि नमक हराम 1973 में रिलीज हुई थी , उस फिल्म में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे कई सारे मशहूर अभिनेता और कलाकार शामिल थे। उन्होंने कहा कोई भी यह एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था कि एक नया लड़का जिसे कोई जानता नही है एक छोटा सा रोल है फ़िल्म में अगर उस रोल को निकाल भी दें फ़िल्म से तो उससे फ़िल्म को कोई फर्क नही पड़ता , लेकिन वह रोल पब्लिक को बहुत पसंद आया।

लोग इस बारे में चर्चा करने लगे कि यह नया लड़का इतने बड़े सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ रोल कर रहा है और इतना अच्छे डायलॉग बोल रहा है इतनी अच्छी शायरी कर रहा है आखिर कौन है यह लड़का क्योंकि वह मेरे को जानते भी नहीं थी। तो उस फिल्म से मुझे बहुत प्यार मिला इज्जत मिली और एप्रिसिएशन मिला लेकिन सिर्फ हिस्से में तारीफ आई काम नहीं मिला। और मैं इसका किसी को दोषी नहीं ठहराता। मैं मानता हूं कि मुझ में कमियां थी मैं दुबला पतला था मेरी स्क्रीन पर्सनैलिटी नहीं थी। मेरे हिस्से में जो आया मैं उस पर काम करता चला गया।

अभिनेता रजा मुराद ने बताया कि उनकी लाइफ में जो टर्निंग पॉइंट आया वह 1980 में आया उस समय राज कपूर साहब प्रेम रोग फिल्म की कास्टिंग कर रहे थे। तो रात को 3:00 बजे उन्होंने अपने प्रोडक्शन मैनेजर रवि मल्होत्रा को फोन किया और उन्होंने उससे कहा कि “रवि एक ऋषिकेश ने फिल्म बनाई थी मजदूरों के ऊपर जिसमें एक लड़का था दुबला पतला सा लंबी हाइट का जिसकी आवाज मोटी सी थी क्या नाम था उसका” तो उन्होंने बताया कि वह तो मुराद साहब के लड़के हैं रजा मुराद तो उन्होंने कहा कि उन्हें बुलाइए। तो जब वह कास्टिंग कर रहे थे और बच्चों से उन्होंने डिस्कशन किया, तो जो मेरा रोल था उस समय वह सुमेरगंज का राजा ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह का था बच्चो ने जब यह पूछा कि यह रोल आप किसे दे रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह रोल में रजा मुराद को दे रहा हूं।

 

तो फिर बाकी सब कहने लगे कि ये रोल रजा मुराद पर सूट नही करेगा। तो उस समय उन्होंने कुछ नहीं कहा फिर राज कपूर साहब ने मुझे बुलाया। उसके बाद जब मैं राज कपूर साहब से मिलने गया जो मेरी उनसे पहली मुलाकात थी उन्होंने मुझसे कहा की रजा हम एक तस्वीर बना रहे हैं और यह तस्वीर जो हम बना रहे हैं उसका नाम है ‘प्रेम रोग’ इसमें एक किरदार है ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह का जो अपनी बेवा भाभी के साथ जबरदस्ती करता है और वह बहुत ही ताकतवर इंसान हैं और इस रोल के लिए अब हमारे जहन में सिर्फ आप ही आप हैं। आप मना करेंगे तो फिर हम किसी और के बारे में सोचेंगे।

 

उन्होंने कहा अब मुझे थोड़ा डर भी लगने लगा था और मुझे लगा कि आप यह मुझे बहुत ज्यादा आवर एस्टीमेट कर रहे हैं कि मैं इनकी फिल्म मैं मेन विलेन का रोल करूंगा। वह भी इतनी बड़ी फिल्म में मैने सोचा की वह इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझे दे रहे हैं मैं उसे निभा पाऊंगा भी कि नहीं। तुम मुझे डर भी लगा और डर के साथ-साथ खुशी भी हुई मुझे यह इतना अच्छा प्लेटफार्म मुझे मिलने जा रहा है। अपने आप को प्रूफ करने के लिए वह भी एक अभिनेता के तौर पर। तो जब मैंने उस फिल्म में काम करना शुरू किया और उसने मेरा जब पहला सूट था जिसने मुझे महिला के साथ रेप करना था और वह सीन जब मैंने खत्म किया और मैं मुंबई पहुंचा तो मुझे राज कपूर साहब ने फोन किया और मुझे उन्होंने कहा कि मुझे आपसे मिलना है।

जब मैं उनसे मिलने गया तो वहां पर उनकी पूरी टीम मौजूद थी और राज कपूर साहब ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारा सीन दिखाना चाहता हूं जो हमने शूट किया था तो जब उन्होंने मुझे वह सीन दिखाया तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था यह जो अभिनय कर रहा है यह व्यक्ति में ही हूं फिर उसके बाद राज कपूर साहब ने मुझे कहा यह जो आप लोग देख रहे हैं यह सभी मुझसे कह रहे थे की रजा साहब ऊपर यह सीन सूट नहीं करेगा लेकिन मैंने उनसे कहा था यह सीन रजा साहब ही करेंगे मेरी भी आंखें हैं और इस फिल्म के तुरंत बाद उन्होंने राम तेरी गंगा मैली फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी। तो उसके बाद लोग भी चर्चा करने लगे कि राज कपूर साहब ने नया विलन फिल्म इंडस्ट्री को रजा मुराद के रूप में दिया है जो अपना किरदार बखूबी निभाता है।

 

अभिनेता रजा मुराद ने पहले की फिल्मी दुनिया और अभी के समय में बन रही फिल्मों के बारे में बताते हुए कहा कि पहले की फिल्मों में और अभी की फिल्मों में जमीन आसमान का अंतर हो गया है कुछ चीजें इसमें अच्छी भी हैं और इसमें कुछ बुराइयां भी है पहले हम अच्छी चीजों की बात करते हैं जैसे कि पहले कई सारी चीजें फिल्म इंडस्ट्री के अंदर नहीं होती थी जैसे कि कास्टिंग डायरेक्टर इतनी बड़ी फिल्म मेकिंग टीम या फिर वैनिटी वैन जिसमें एक्टर आराम करते हैं लेकिन अब इन सभी चीजों की सुविधा है साथ ही उन्होंने बताया कि पहले कभी ऐसा नहीं होता था कि किसी के जीते जी किसी की बायोपिक बने जैसे कि आज के समय में हम देख रहे हैं और पहले फिल्म का हीरो सब कुछ तय करता था कि फिल्म में हीरोइन कौन सी होनी चाहिए सिंगर कौन सा होना चाहिए या फिर किस जगह सूट होना चाहिए लेकिन अब इस पर पूरी टीम मिलकर काम करती है। और इस चीज का भुगतान हमने भी किया है। उन्होंने बताया कि किसी ने उनसे सवाल किया की राज कपूर और दूसरे फिल्म डायरेक्टर में क्या अंतर है तो मैंने उनसे कहा कि जो दूसरे फिल्म डायरेक्टर हैं वह स्टाफ के साथ काम करना पसंद करते हैं और राज कपूर जिसके साथ काम करते हैं वह स्टार बन जाता है।

कार्यक्रम के दौरान लाइव शो में अभिनेता मुराद रजा की प्रशंसक पवन अग्रवाल और उनकी पत्नी कवित्री उर्वशी अग्रवाल ने भी भाग लिया और उन्होंने अभिनेता मुराद रजा से लाइव शो के दौरान बातचीत की और उनसे उनके पिता के बारे में पूछा जिस पर अभिनेता मुराद रजा ने कहा कि मैंने अपने पिता से अपने जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज सीखी वह है समय पर कुछ भी करना। उन्होंने कहा मुझे याद है जब मुझे सुबह 7:00 बजे कहीं उठकर जाना होता था तो मेरे पिताजी सुबह 6:00 बजे ही मुझे उठाने के लिए आ जाते थे और उनके हाथ में चाय की ट्रे रहती थी। वह मुझसे कहते थे उठ जा चाय पी ले जल्दी जल्दी तैयार हो जा और यहां से निकल। वह मुझे हमेशा कहते थे कि तुम्हें टाइम पर घर से निकलना है बेटा चाहे काम हो या ना हो।

अभिनेता रजा मुराद ने बताया कि उन्होंने शायद हिंदुस्तान की ऐसी कोई भाषा नहीं होगी जिसमें उन्होंने फिल्म ना की हो और उन्होंने अंग्रेजी और रशियन फिल्म में भी बतौर अभिनेता काम किया है। उन्होंने बताया कि बहुत मुश्किल होता है उस भाषा को बोलना जो बिल्कुल आपके लिए एक एलियन की भाषा की तरह लगती हो। उसमें आपको एक्सप्रेशंस भी देने हैं आपको डायलॉग्स भी याद करने हैं। एक तेलुगु की फिल्म थी जिसका नाम था चिन्ना और आप यकीन नहीं मानेंगे मेरा उस फिल्म में रोल था एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का कितने में तेलुगु में हर किसी को गाली दे रहा हूं या फिर लड़ रहा हूं और वह 3 दिन मैं अपनी जिंदगी के कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने बताया कि यह सब जिंदगी की एक चैलेंज जीत होती है जो आपको लेने चाहिए।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि पूरी दुनिया इस संक्रमण से जूझ रही है और यह समय सिर्फ भारत के साथ ही नहीं यह सैलाब पूरी दुनिया में आया हुआ है, दुनिया का हर शख्स डरा हुआ है और कोई भी इंसान यह क्लीन नहीं कर सकता कि मुझे कोविड से कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा मानो या ना मानो आपकी आजादी आपसे छीन गई है और इंसान एक आजाद परिंदा होता है लेकिन उन्होंने कहा कि आप इस कैद को पॉजिटिव लीजिए यह आपकी सेफ्टी है उन्होंने कहा अगर जान है तो जहान है आप अपनी सेफ्टी का ख्याल रखिए अपना ख्याल रखिए अपने परिवार वालों का ख्याल रखिए मास्क का इस्तेमाल कीजिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल कीजिए अपने आप को इस कोरोना से बचाकर रखिए। उन्होंने कहा रात के बाद हमेशा सवेरा होता है अच्छा वक्त रहता है ना बुरा वक्त रहता है बुरे वक्त के बाद हमेशा अच्छा वक्त आता है। बुरा वक्त आज है तो यह कुदरत का कानून है तो यह हमेशा नहीं रहेगा कोई भी चीज हमेशा नहीं रहती है। उन्होंने कहा तमाम जिम्मेदारियां जो है वह सिर्फ सरकार के नहीं है कोविड आपके घर चलकर नहीं आता आप उसे लेकर आते हैं और ना सिर्फ आप उसे घर में लेकर आते हैं आप उसे घर में फैला भी देते हैं , तो बेहतरीन तरीका यह है कि जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकले।

 

वही कार्यक्रम का संचालन कर रही डॉ योजना शाह जैन ने मशहूर अभिनेता रजा मुराद को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया , साथ ही दर्शकों को भी धन्यवाद किया , उन्होंने कहा कि बहुत से दर्शकों ने जो रजा मुराद से प्रश्न किए , उनका जवाब मशहूर अभिनेता रजा मुराद द्वारा दिया गया।

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