सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार, कहा- लाशें हैं ज्यादा, जाँच हो रही है कम

Rohit Sharma

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नई दिल्ली :– देश में कोरोना के संक्रमण से होने वाली मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। देश में कोरोना की वजह से अब तक 8498 लोगों की जान जा चुकी है. इन सबके बीच अस्पतालों में कोरोना मरीजों के शवों के साथ गलत व्यवहार की घटनाएं भी देखने को मिल रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब महामारी का संक्रमण बढ़ रहा है तो चेन्नई और मुंबई की तुलना में दिल्ली में जांच कम क्यों की जा रही हैं ।

कोरोना मरीजों की शवों के साथ गलत और अमानवीय व्यवहार पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ​देश की राजधानी में और उनके अस्पतालों में बहुत बुरा हाल है।

दिल्ली के अस्पतालों में गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा है. अस्पताल डेड बॉडी का रख रखाव और निपटारा केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए नियमों के मुताबिक नहीं कर रहे हैं ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके परिजनों को इस बारे में जानकारी तक नही दी जा रही है. कई ऐसे मामले भी देखने को मिले हैं, जिसमें कोरोना मरीजों के परिजन उनके अंतिम संस्कार में इस लिए शामिल नहीं हो सके क्योंकि उनके खबर देने तक की जहमत नहीं उठाई गई।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और उनके अस्पताल की ओर से बरती गई लारवाही पर जवाब दाखिल करने को कहा है.सुप्रीम कोर्ट ने एलएनजेपी अस्पताल की स्थिति को गंभीरता से लिया है और उसे भी जवाब दाखिल करने को कहा गया है ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिल्ली सरकार और यहां के अस्पताल जिस तरह से कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं और शवों के साथ जैसा व्यवहार किया जा रहा है वह काफी भयानक और डरावना है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि अस्पतालों में हर जगह बॉडी फैली हुई है और लोगों का उसी जगह पर इलाज भी किया जा रहा है ।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि राजधानी में कोरोना मरीजों का सही तरीके से इलाज नहीं किया जा रहा है. दिल्ली में 2 हजार बेड अभी भी खाली पड़े हैं लेकिन मरीजों को देखने वाला कोई नहीं है ।

अदालत ने उन वीडियो का भी जिक्र किया है, जिसमें मरीज रो रहे हैं और उन्हें देखने के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की जो स्थिति है वह बहुत ही दुखदाई है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार कोरोना के टेस्ट कम क्यों कर रही है. क्या सरकार बनावटी फिगर चाहती है. राज्य की ड्यूटी है कि वह टेस्टिंग को बढ़ाए ।

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