आ गया चुनाव: श्रवण कुमार शर्मा

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जिसके लिये कथित विकास के सारे पापड बेल रहे थे ,वो घड़ी आ गयी .परिवार में ,पिता-पुत्र में जो तकरार हो गयी ,सत्ता की खातिर , उसकी भी कहानी का ऊंट किसी करवट तो बैठेगा .दलित को ताकत देने की काठ की ह्नडिया फिर चढेगी .जो चुन कर अस्त हो गये थे वे सितारे फिर आसमान पर प्रगट हो जायेंगे .फिर राष्ट्र और संस्कृति कि चिंता करने वाले अपने मधुर गान छेडेंगे .इस बार किसान को क्या बोलेंगे ,फसल के दाम तो पिटवा दिये .नावा तो बैंक चला गया और छूट के नाम पर भाषण .चुनाव कैसे लड़ा जायेगा ,बेदर्दी कुछ तो सोचा होता .खैर रास्ते हमारे पास हैं .हमारे गांव में रिजर्व बैंक की नही हमारी चलती है .देखते हैं किस का खोटा सिक्का चलता है ,किस का खोटा उम्मीदवार जीतता है .चुनाव तो ज़रूर लडेंगे .हैं सब एक से .

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