नोएडा फोनरवा के बैठक में जोरदार हंगामा , संस्थापक और आजीवन सदस्यों पर नहीं बनी सहमति

ROHIT SHARMA

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नोएडा :– नोएडा के सेक्टर 52 में स्थित सामुदायिक केंद्र में फोनरवा द्वारा वार्षिक संयुक्त बैठक की । आपको बता दे कि इस बैठक में नोएडा के तमाम आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष , सचिव , महासचिव समेत पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया । ये बैठक हर साल फोनरवा की तरफ से कराई जाती है , जिसमे नोएडा के हर सेक्टरों के एक साल के अंदर हुए कार्यों के बारे में चर्चा की जाती है । वही आज 2017 में हुए कार्यों को लेकर चर्चा की गई । साथ ही इस बैठक में 2017 में हुए कार्यों में खर्चा के बारे में भी बताया गया ।

वही दूसरी तरफ नोएडा के कुछ सेक्टरों में हो रही समस्याओं को लेकर भी वार्तालाप हुई । खासबात ये है की फोनरवा की वार्षिक संयुक्त बैठक में पीएस जैन के निष्काषित होने को लेकर घमासान शुरू हुआ गया ।

दरअसल इस बैठक में फोनरवा के द्वारा पीएस जैन को निष्काषित करना था , लेकिन पूर्ण बहुमत न मिलने पर फोनरवा को ये कदम वापस लेना पड़ा । जैसे ही पीएस जैन के मामले में फोनरवा ने अपनी आवाज उठाई , वैसे ही कुछ तमाम आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है । वही इस विरोध से इस बैठक को बीच मे थोड़ी देर के लिए रोक दिया था। वही थोड़ी देर बाद इस बैठक में अन्य पदाधिकारी ने विरोध करने वालों को शांत कराया , उसके बाद फोनरवा के द्वारा खर्च किए गए सालाना हिसाब को चर्चा की गई , जिसमे विपक्ष के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया |

उनका कहना है की फोनरवा के द्वारा दिए गए सालाना हिसाब में कुछ गड़बड़िया नजर आई , जैसे की एक साल के अंदर फ़ोन का खर्चा 15 हज़ार रूपये से अधिक दिखाया गया , लेकिन आज के समय में 4800 रूपये में एक साल के अंदर अनलिमिटेड फ़ोन पर बात कर सकते हो | जिसको लेकर फोनरवा की तरफ से खर्चा के बारे में सभी पदाधिकारी को बताया गया , जिसके बाद इस मामले में सहमति बन गई |

वही पदाधिकारी का आरोप है की फोनरवा के आजीवन सदस्य को हटाने एवं उनके मताधिकार को खत्म करने के लिए इस बैठक में आए हुए समस्त लोग ध्वनिमत से सहमति जताई , इस पर नाराज होकर मंच पर बैठे फोनरवा के लोग उठ कर चले गए। जिसको लेकर फोनरवा के अध्यक्ष एनपी सिंह का कहना है की संस्थापक और आजीवन सदस्य को लेकर विरोध कर रहे है , वह बिलकुल गलत है | उनका कहना है की फोनरवा के संस्थापक 8 और 11 आजीवन सदस्य है , जिन्होंने फोनरवा में अपना योगदान दिया है , साथ ही ये वो लोग है जो आरडव्लूए और सचिव के चुनाव जीतकर आए है | फोनरवा चाहती है की और भी लोग इस संस्था से जुड़े जिससे फोनरवा की संस्था बढ़ सके , लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है की विपक्ष के लोग इसका विरोध कर रहे है |

उन्होंने बताया की विपक्ष पार्टी के कुछ पदाधिकारी ये चाहते है की फोनरवा के संस्थापक 8 और 11 आजीवन सदस्य को चुनाव के दौरान अपना मत नहीं देना चाहिए , जो हो नहीं सकता , लेकिन फोनरवा ने कहा की इस मामले में सभी आरडव्लूए के अध्यक्ष , सचिव समेत पदाधिकारी इस बैठक में अपना मत दे | वही विपक्ष पार्टी ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया , विपक्ष पार्टी का कहना है की इस मामले में गोपनीय तरिके से वोटिंग किए जाए , लेकिन ये उस समय हो नहीं सकता था |

एनपी सिंह का कहना है की इस मामले में कुछ दिनों बाद वोटिंग की जाएगी , जिससे साफ हो जाएगा की फोनरवा के संस्थापक और आजीवन सदस्यों को हटाना या रखना चाहिए | वही दूसरी तरफ विपक्ष पार्टी ने जो आरोप लगाए वह बिलकुल निराधार है इस बैठक में फोनरवा का कोई भी सदस्य उठकर नहीं गया , बल्कि विरोध करने वाले कुछ लोगों को शांत कराने में लगा हुआ था | साथ ही ये बैठक शांतिपूर्ण तरिके से चल सकती थी , अगर विपक्ष पार्टी के कुछ सदस्य जमकर विरोध नहीं करते |

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