मोदी सरकार -संभावनाएं, सीमाये और कमजोरियां: श्रवण कुमार शर्मा

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मोदी सरकार को लगभग ११ माह व्यतीत हो रहे हैं . मीडिया ने उनके एक एक दिन की समीक्षा की है . मीडिया और जनता की इतनी कड़ी निगरानी के अंतर्गत न कोई सरकार रही है और न कोई प्रधान मंत्री .हमने इस मध्य हड़बड़ी में कोई टिप्पणी नहीं की है और इस सरकार के प्रति अपना विश्वास और आशा बनाये रक्खा है . निसंदेह मोदीजी दिनरात कड़ा परिश्रम कर रहें हैं और वे तथा उनकी सरकार पूर्णतया बेदाग है .सरकार की अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धिया हैं ,जिनमे मोदीजी की विदेश यात्रायें ,कोल mines की कामयाब नीलामी, २जी की नीलामी आदि शामिल है.इसमें भी शक नहीं है कि मोदी जी को देश बेहद खराब हालत मै मिला है , जिसका कारण UPA का दस वर्ष का अशासन और कुशासन है.देश की रक्षा प्रणाली कमजोर बना दी गयी हैःMANFACTURING SECTOR की स्थिति ऐसी कर दी गयी है की अगले अनेक वर्षों तक इसमे बड़ा सुधार संभव नहीं है , मोदी सरकार कितना ही मेहनत कर ले . सरकार की चुनोतिया बहुत विशाल हैं . मोदी जी से आम भारतीय , जिसमे गरीब और पूंजीपती सामान रूप से शामिल है की अपेक्षाएं बहुत अधिक है लोगों को सबसे बड़ी उम्मीद भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और ब्लेक मनी पर कड़ी कार्यवाही की थी , पर इस दिशा में मोदी सरकार ने बेहद निराश किया है .अब ऐसा लगता भी नहीं है कि यह सरकार इस दिशा में कोई बड़ी पहल या कारवाही करने की इच्छा शक्ति रखती है .देश के किसानों ने मोदीजी का व्यक्तिगत तौर पर बड़े पैमाने पर समर्थन किया था ,यद्यपि BJP के सम्बन्ध मै उनकी आशंकाएं बरक़रार थी.आज किसान संकट में है पर ऐसा नहीं लगता कि मोदीजी उनके सबसे बड़े मित्र हैं.लगता भी नहीं ही है कि इस सरकार मेंकोई कृषि मंत्री है. यदि मोदीजी अपने इस आधार पर पकड बनाये रखना चाहते हैं तो उन्हें यह मंत्रालय अपने पास ले लेना चाहिए और ३ माह केवल कृषि विकास की बात करना चाहिए .रक्षा , रेलवे , विदेश ,वित्त और कोयला तथा ऊर्जा को यदि छोड़ दिया जाये तो सरकार के अन्य मंत्री निष्क्रिय और दिशाहीन दिखाई पड़ रहे है उन्हें इतना बड़ा सम्मान और दायित्व मिला है पर उनमे न तो उत्साह है और ना ही ब्यूरोक्रेसी पर उनकी पकड़. शिक्षा और मानव विकास के अनेक मंत्रालयों को ना तो कोई उपयुक्त मंत्री दिया गया है और ना ही लगता है सरकार को इनकी कोई परवाह है . लगता है धीरे धीरे ब्यूरोक्रेसी का एक हिस्सा प्रधान मत्री की सोच पर हावी होता जा रहा है .बीजेपी की राज्य सरकारें अन्य राज्यों की सरकारों से कहीं भी बेहतर नहीं दिखाई पड़ रही है .बीजेपी में अनुशासन का ढोंग तो है पर कोई सुपरिभासित केंद्रीय नेतृत्व या कमान नहीं है .मीडिया का बड़ा हिस्सा बेलगाम हो चला है परन्तु मोदीजी के पास एक अदद सूचना एवं प्रसारण मंत्री नहीं है .इतने बड़े मैन्डेट के बाद अब यह कौन स नया paralysis आ गया है? अब ऐसा लगता कि सरकार शायद ऐसी ही चलती है , ज्यादा भ्रम पालना ठीक नहीं है . कोई बेवजह नुय्कलर डील पर अड् जाता है तो कोई भूमि अधि ० विधेयक पर सरकार की प्रतिष्ठा दाँव पर लगा देता है , वाह री ब्यूरोक्रेसी तेरे मोहपाश से कोई बाहर नहीं जा सकता.

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