ग्रेटर नोएडा में गरीब बच्चों को शिक्षित करने का प्रण लेकर लगातार आगे बढ़ रहे अवधेश पांडेय से टेन न्यूज़ ने की ख़ास बातचीत

Abhishek Sharma

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Greater Noida (20/01/19) : अवधेश पांडेय जो कि ग्रेटर नोएडा में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और पिछले करीब दो साल से सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे बच्चे जो गरीब हैं और उनके माता पिता उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते, उन बच्चो को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं। करीब 2 साल पहले अकेले ही उन्होंने गरीब बच्चों को शिक्षित करने का संकल्प लेकर निकले थे। आज उनके साथ कुछ अन्य लोग भी है, जो उनके इस अभियान में उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं। कार्तिकेय विद्या केंद्र के नाम से उनका सेंटर है जिसमे करीब 60 बच्चों को वे शिक्षा प्रदान करा रहे हैं। उनकी इस यात्रा को लेकर टेन न्यूज़ से उनसे ख़ास बातचीत की।

उन्होंने कहा मेरा मानना है कि ज़िंदगी में कुछ न कुछ परमार्थ करते रहना चाहिए। शुरू से ही मै परमार्थ के कार्यों में लगा रहता था। पिछले 12 वर्षों से मै ग्रेटर नोएडा शहर में रह रहा हुँ, तभी से सामजिक कार्यों में सक्रिय हुँ। 12 सालों से कभी सामजिक कार्यो में लगा रहता था कभी छोड़ देता था। फिर मुझे लगा कि अगर मै लगातार काम कर रहा हु तो मेरे पास बच्चे भी ऐसे होने चाहिए जो लगातार मेहनत कर सकें और उनपर लगातार काम किया जा सके।


पहले छोटे-छोटे सेंटर थे तो उनसे ज्यादा लाभ दिखा नहीं। उसके बाद ये जो सेंटर है यह स्थायी रूप से हम पिछले दो साल से चला रहे है। जिस तरह से इस सेंटर के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा का निखार हो रहा है उसे देखकर लगता है कि आने वाले दो-तीन सालों में उसका लाभ निश्चित ही दिखाई देगा। बहुत सरे लोग पढ़ाई-लिखाई करने के बाद सोचते हैं कि कोई उनकी नौकरी लगवा दे, नौकरी के लिए किसी रिस्तेदार या सफल आदमी के पीछे घूमते हैं। मेरा लक्ष्य है कि इन सभी बच्चों को इतना काबिल बनाया जाए जिससे कि इन्हे नौकरी के लिए इस तरह से लोगों के पीछे घूमना न पड़े।

 

उन्होंने आगे कहा कि हमारे हिन्दू समाज में प्रयत्न के देवता कार्तिकेय भगवान को माना जाता है, जिन्होंने सोचा था कि मै अपने दम पर पृथ्वी की परिक्रमा लगाऊंगा। कार्तिकेय भगवान से प्रेरणा लेकर मैने प्रयत्न करना शुरू किया। इस समाज मे प्रयत्न करने वाले इंसान की कभी हार नहीं होती है। जिसकी वजह से ही इस कार्तिकेय विद्या केंद्र को बिना किसी परेशानी के सुचारु रूप से हम चला रहे हैं।

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