मलेशिया में फंसे परिजनों को बचाने के लिए भटक रहा भाई, मानव तस्करी का शिकार हुए मामा-भांजे

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बिहार के रहने वाले कई लोगों को वहीँ के एक अन्य स्थानीय एजेंट ने मलेशिया में कंप्यूटर के पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर विदेश भेजा और उन लोगों को मलेशिया में ही एक मानव तस्करी करने वाले व्यक्ति को 5 लाख में बेच दिया।

मलेशिया में बेचे गए 5 लोगों में से 2 लोग तो चंगुल से किसी तरह से छूटकर भागकर एम्बेसी के पास पहुँच गए थे और उन्हें भारत वापस भेज दिया गया था लेकिन 3 लोगो वहीँ पर फंसे रह गए थे जिनमे से एक का कोई सुराग नहीं है कि वो कहाँ है। जबकि दो लोगों को वहाँ की स्थानीय पुलिस ने पासपोर्ट न होने के कारण 14 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया । गिरफ्तार किए गए दोनों लोग मामा-भांजे हैं। उनके परिजन उन्हें वापस लाने के लिए दरबदर भटक रहे हैं। उन्हें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिल पा रही है।

मूलरूप से बिहार के रहने वाले नाजिर अब नोएडा के सेक्टर-110 में रहते हैं। उन्होंने बताया कि 2 मई 2018 को उनके भाई शमशाद अली और भांजे एकराम अली `समेत 5 लोगों को बिहार के ही रहने वाले एक एजेंट ने कंप्यूटर के पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मलेशिया भेजा था और बदले में सभी लोगों से एक-एक लाख रूपये रिश्वत के तौर पर लिए थे।

उन्होंने बताया कि एजेंट ने सभी लोगों को विजिटर वीजा बनवाकर मलेशिया भेजा था जो कि 15 दिनों तक वैध था। सभी लोगों को एजेंट सैफुल्ला ने पहले मुंबई में अन्य एजेंट सोनू के पास भेजा फिर सोनू ने उन लोगों को ट्रेवल एजेंसी चलाने वाले रईस शेख के पास भेजा उसने सभी लोगों को कोच्चि से फ्लाइट में मलेशिया के लिए रवाना कर दिया।

मलेशिया में बिहार से गए पाँचों लोगों को एयरपोर्ट पर लेने गिरी नामक एक व्यक्ति आया और दो दिन अपने पास रखा फिर अगले दिनों पांचो लोगों को जंगल में लेकर गया जहाँ उन्हें फावड़ा थमाते हुए खुदाई करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी में नौकरी दिलाने के लिए यहां भेजा गया है वो यह काम नहीं करेंगे। इसपर गिरी नामक व्यक्ति ने बताया कि उसने प्रत्येक व्यक्ति के रईस शेख को 5 लाख रूपये दिये हैं, और जो वो चाहेगा वही काम उनको करना पड़ेगा। ऐसा न करने पर उन लोगों के शरीर के हिस्सों को बेचने की भी बात कही और सभी लोगों के पासपोर्ट भी छीन लिए गए।

कुछ महीने काम करने के बाद किसी को भी सैलरी नहीं दी गई तो उनमे से 2 व्यक्ति वहां से भाग निकले और मलेशिया में भारतीय एम्बेसी के दफ्तर पहुँच गए। नाजिर का कहना है कि एम्बेसी द्वारा भारत भेजे गए दोनों व्यक्तियों से 50-50 हजार रूपये की रिश्वत ली गई जिसके बाद ही उन्हें यहां पर भेजा गया है। नाजिर ने बताया कि 14 अगस्त को उनके भाई और भांजे को मलेशिया पुलिस ने पासपोर्ट न होने के कारण गिरफ्तार कर लिया। तब से ही वो उन दोनों को वापस लाने के कोशिश -कर रहे है लेकिन किसी से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वह मदद के लिए दिल्ली मंत्रालय और बिहार के स्थानीय सांसद के पास गए लेकिन उन्होंने भी कोई मदद नहीं कि। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद के लिए पत्र भी लिखे लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं आता है। ट्विटर के माध्यम से भी उन्होंने कई बार सुषमा स्वराज को टैग किया है। 20 तारीख को पीड़ित ने गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी बीएन सिंह को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाईं है।

पीड़ित ने बताया कि तस्करों के चंगुल से छूट कर आए लोगों ने उन्हें बताया कि मलेशिया में भारत के करीब 1400 लोग तस्करों के कब्जे में काम कर रहे हैं। देश में तस्करों का गिरोह काम कर रहा है जो कि लोगों को नौकरी का झांसा देकर बेच देते हैं और वहां पर उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जाता है।

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